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आंदोलन खत्म करने के सवाल पर किसान बोले- कोरोना कहां है? बीजेपी बोली- ये बहुत जरूरी, कांग्रेस ने किसानों पर छोड़ा

अमन शर्मा

नई दिल्ली. दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए क्या दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को अपना आंदोलन खत्म कर घर लौट जाना चाहिए? क्योंकि कम से कम एक ऑक्सीजन कंपनी ने शिकायत की है कि किसानों की ओर से रास्ता ब्लॉक किए जाने के चलते उन्हें राजधानी दिल्ली में सप्लाई पहुंचाने के लिए लंबा रूट पकड़ना पड़ रहा है, जिससे सप्लाई ट्रकों को काफी समय लग रहा है. कंपनी की ओर से शिकायत किए जाने के बाद पिछले पांच महीने से चल रहे किसान आंदोलन की नैतिक जवाबदेही को लेकर बहस खड़ी हो गई है.

इस बारे में नई दिल्ली से बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने न्यूज18 से बातचीत करते हुए कहा, “मैं चकित हूं कि किसानों की भारत और भारतीयों के प्रति कोई जवाबदेही है कि नहीं. क्या ऑक्सीजन सप्लाई में देरी के चलते अस्पतालों में लोगों की मौत पर किसान खुश होंगे? किसानों की प्रतिबद्धता किसके प्रति है?” लेखी ने कहा कि ये सही समय है कि आंदोलन को खत्म कर दिया जाए. उन्होंने कहा, “कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए कोर्ट को आदेश पारित करना चाहिए कि किसानों को वापस भेजा जाए. उस आदमी से पूछिए जिसका पिता अस्पताल में ऑक्सीजन का इंतजार कर रहा है, क्योंकि सड़कें ब्लॉक हैं.”

दरअसल सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि एक बड़ी ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने अपने ट्रकों के लिए दिल्ली तक ग्रीन कॉरिडोर की मांग की है, क्योंकि किसानों के प्रदर्शन स्थल के चलते कंपनी को यूपी में मोदीनगर स्थित अपने यूनिट से दिल्ली आने के लिए 100 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. किसान गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले पांच महीनों से डेरा डाले हुए हैं. इसी तरह की स्थित पानीपत स्थित IOCL को भी दिल्ली तक अपने ऑक्सीजन सिलिंडर भेजने के लिए सिंघु बॉर्डर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि सप्लायर कंपनी ने आधिकारिक तौर पर न्यूज18 से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. सिंघु बॉर्डर पर पिछले पांच महीनों से किसानों का जत्था केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है.एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने न्यूज18 से कहा, “ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा के अलावा दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है. उनका प्रदर्शन स्थल ‘सुपर स्प्रेडर’ बन सकता है. अधिकारी ने कहा कि किसानों के प्रदर्शन स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का पालन नहीं हो रहा है, इसके अलावा किसान लगातार पंजाब स्थित गांव से दिल्ली तक आवागमन करते रहते हैं, जिसकी वजह से संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है.” उन्होंने कहा, “पंजाब में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखिए हो सकता है कि दिल्ली और पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन से भी इसका कोई कनेक्शन हो.”

बीजेपी के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक साल के सस्पेंड कर दिया गया है. उन्होंने कहा, “सरकार ने कृषि कानूनों को लंबे समय के लिए सस्पेंड करने का ऑफर किया था. किसान वापस जा सकते हैं और एक साल बाद एक बार फिर वापस आ सकते हैं, अगर वे कृषि कानूनों को लेकर संतुष्ट नहीं होते हैं.”

दूसरी ओर बीजेपी के आईटी सेल हेड और प्रवक्ता अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “दिल्ली, ऑक्सीजन के लिए तड़प रही है, क्योंकि आंदोलन-जीवियों ने हाइवे ब्लॉक कर रखा है और सप्लायर कंपनियों का कीमती वक्त जाया हो रहा है. केजरीवाल इन प्रदर्शनकारियों को भोजन पानी दे रहे हैं, जिनकी नजर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों पर है, जिसका परिणाम दिल्ली को भुगतना पड़ रहा है. लेकिन, केजरीवाल को इसकी परवाह नहीं है.”

किसानों की मर्जीः कांग्रेस
हालांकि कांग्रेस का किसान आंदोलन पर अलग मत है. पार्टी का कहना है कि ये किसानों की मर्जी है, अगर कोरोना की दूसरी लहर के चलते वे आंदोलन को सस्पेंड करना चाहते हैं. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने न्यूज18 से कहा, “ये फैसला उनको लेना है. ये पूरी तरह उनका फैसला होगा. मैं कहना चाहूंगा कि उनके ऊपर अपने परिवार और खुद की जिंदगी को बचाने की जिम्मेदारी भी है.” हालांकि जाखड़ ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया कि पंजाब में कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने के लिए किसान आंदोलन जिम्मेदार है. उन्होंने कहा, “इस बात का कोई सबूत नहीं है. कोरोना पंजाब के शहरी इलाकों में फैला है. ग्रामीण इलाकों में इसका बहुत ज्यादा असर नहीं है, जबकि किसानों को अपने गांव और दिल्ली के बीच आना-जाना एक मानक प्रक्रिया के तहत ही होता है.”

कांग्रेस नेता ने कहा कि कोरोना से निपटने में केंद्र सरकार अपनी क्रेडिबिलिटी खो चुकी है. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने अपनी चुनावी सभाओं में कोरोना वायरस गाइडलाइंस को हवा में उड़ा दिया, और किसानों को इन दोनों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. जाखड़ ने कहा, “केंद्र सरकार की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है. कोरोना वायरस को लेकर उनकी चेतावनियों पर कोई भरोसा नहीं करता है, क्योंकि चुनावी रैलियों में वे खुद इसका पालन नहीं करते हैं.” उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय को एक अराजनीतिक टीम किसानों के पास भेजनी चाहिए, जो उन्हें कोरोना वायरस के मौजूदा खतरे के बारे में बताए. इसके साथ ही जाखड़ ने उन दावों को भी खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा है कि था कि किसानों के रास्ता जाम करने की वजह से ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा आई है. उन्होंने कहा कि ये सब बकवास है और किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए मीडिया में उछाला गया है.

कोरोना- ये क्या है?
वरिष्ठ किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रेसिडेंट बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि ना तो वे अपना आंदोलन समाप्त करेंगे और ना ही इसे स्थगित करेंगे. राजेवाल ने न्यूज18 से कहा, “किसानों के प्रदर्शन स्थल पर कोई कोरोना नहीं है. हमने एक भी केस नहीं पाया है. ऐसे में ये कहा जाना कि ‘किसानों को वापस चले जाना चाहिए’ किसान आंदोलन के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश है, हमें पता है कि एक बार किसानों के पंजाब वापस लौटने के बाद सरकार उन्हें कभी भी दिल्ली नहीं आने नहीं देगी. लिहाजा हम कहीं नहीं जाने वाले.”

किसान नेता ने कहा कि किसानों ने किसी भी ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले ट्रक को वापस नहीं लौटाया. उन्होंने कहा कि वास्तव में धरना स्थल के पास यातायात संभालने की जिम्मेदारी पुलिस के पास है और ऐसे वाहनों को पुलिस ही लौटा रही है. राजेवाल ने कहा, “सिंघु और गाजीपुर प्रदर्शन स्थल के पास ब्लॉक रोड के अलावा कई रोड हैं, जो दिल्ली जाती हैं. वहीं कई रास्तों पर पुलिस ने बैरिकेड लगा रखा है.” उन्होंने बताया, “किसानों ने प्रदर्शन स्थल पर कोरोना से बचाव के लिए कई कदम उठाए हैं, किसान कोरोना गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं, मास्क पहन रहे हैं और सैनिटाइजर का उपयोग किया जा रहा है. साथ ही सिंघु बॉर्डर पर 10 बेड का अस्पताल भी बनाया गया है और डॉक्टरों की टीम भी लगी हुई है.”

राजेवाल ने कहा, “प्रदर्शन स्थल पर कोई कोरोना वायरस नहीं है और अगर संक्रमण फैलता भी है, तो इससे लड़ने के लिए हम सरकार पर निर्भर नहीं हैं.”


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