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ममता की वो बातें, जिसने उन्हें सियासत में शीर्ष तक ही नहीं पहुंचाया बल्कि जीवट भी दिया

ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार बंगाल में सरकार बनाने जा रही हैं. उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल करते हुए 214 सीटें जीती हैं. ममता ने लगातार चुनाव प्रचार किया. उनके एक पैर में प्लास्टर भी बंधा, तब भी वह बैठी नहीं. व्हीलचेयर पर बैठकर पूरे बंगाल को चुनाव प्रचार के लिए नापती रहीं. ममता बनर्जी के बारे में एक बात हमेशा कही जाती है कि वो सादगी से रहती हैं. जुझारू महिला हैं. मुश्किलों से घबराना उन्हें नहीं आता. बंगाल में जिस तरह उन्होंने चुनाव जीता, वो उनके जीवटपन की कहानी कहता है ममता हमेशा ही नीली किनारी वाली सफेद साड़ी और हवाई चप्पल में दिखाई देती हैं. अगर मीडिया में आने वाली खबरों पर यकीन करें तो उनके पास जरूरत के हिसाब से ही कपड़े हैं. वो ज्यादा कपड़े जमा करने में भी यकीन नहीं करतीं. कई बातें हैं जिसने एक राजनीतिज्ञ के तौर पर ममता की शख्सियत को बनाया है. संघर्ष का लंबा रास्ता  ममता ने सियासत में शीर्ष पर पहुंचने से पहले संघर्ष का एक लंबा रास्ता तय किया है. वैसे वो जिस पारिवारिक पृष्ठभूमि से यहां तक पहुंची हैं, वो हंसी खेल नहीं है. बचपन में उन्होंने आर्थिक तंगी भी झेली है. जब वो 9 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद ममता और उनके परिवार ने कई सारी आर्थिक मुश्किलें देखीं.सादी एकरंगी बॉर्डर वाली सफेद साड़ियां ममता सफेद साड़ियों पर एकरंगी बॉर्डर वाली जो साड़ियां पहनती हैं, वो बंगाल के ही धानेखाली इलाके की बनी होती हैं. इन साड़ियों की खासियत है कि ये वहां के चिपचिपाहट-भरे मौसम में भी हल्की और आरामदेह होती हैं.

ममता लगभग हमेशा ही नीली किनारी वाली सफेद साड़ी और हवाई चप्पल में ही दिखाई देती हैं

खाने में भी सादगी दूसरे राजनेताओं से अलग उनके घर पर आने वाले मेहमानों को शाही भोजन की बजाए, स्थानीय खाना ही परोसा जाता रहा. अक्सर उनके घर आने वालों के सामने चाय और मुरमरे का नाश्ता पेश किया जाता है. खुद ममता बंगाल के खाने से अलग बगैर तेल-मसाले वाला खाना पसंद करती हैं. समर्थकों के बीच ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता ऐसी कई वजहों से अपनी सादगी को लेकर जानी जाती हैं. आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी ममता की एक और पहचान उन्हें अलग कतार में खड़ी करती है, वो है उनकी तेज चाल. हवाई चप्पल पहने हुए ममता अक्सर लंबी-लंबी पदयात्राएं करती हैं. उनके तेज और सधे कदम बताते हैं कि वो आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी हैं. वह जब घर से दफ्तर या फिर दूसरी जगहों पर जाती हैं तो उनके साथ गाड़ियों का लंबा-चौड़ा काफिला नहीं होता.

Mamata Banerjee

दक्षिण कोलकाता में ममता का पैतृक निवास हरीश चटर्जी स्ट्रीट में है

मजबूत इरादों वाली और हार नहीं मानने वाली महिला लंबे संघर्ष के बाद जिस तरह उन्होंने बंगाल से वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंका, उनकी छवि एक मजबूत इरादों और कभी हार न मानने वाली महिला की बनी. वैसे राजनीति में बेहद मुखर ममता के निजी जीवन को लेकर लोग काफी उत्सुक रहते हैं. खासकर साल 2019 में पश्चिम बंगाल और केंद्र के बीच सीबीआई को लेकर हुए घमासान के बाद गूगल पर ममता बनर्जी से जुड़े कई सवाल खूब सर्च हुए. जमीन से जुड़ी रहने वाली  ममता बनर्जी का पैतृक घर हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर है, वो काफी साधारण सा घर है. लेकिन केंद्रीय मंत्री रहते हुए वो लगातार इसी घर में रहीं. यहां तक जब वो पहली वर्ष 2011 में पहली बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं तो भी दो साल तक यहीं रहीं. फिर मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में गईं. हालांकि वो अपने इस घर को छोड़ना नहीं चाहती थीं. लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें वहां जाना पड़ा. वो अब भी जमीन से जुड़ी हैं. उनसे लोगों को मिलना जुलना आसान है. वो खुद भी लगातार साधारण मोहल्लों और कालोनियों में जाकर लोगों से मिलती जुलती रहती हैं. महिलाओं पर उनका खासा प्रभाव है. जीवनभर समाजसेवा का फैसला उनके बारे में यह सवाल बार-बार उठता है कि ममता बनर्जी ने कभी शादी क्यों नहीं की? दरअसल स्वभाव से बागी ममता सामाजिक परंपराओं की विरोधी भी हैं. शादी में एक औरत की स्थिति से उनका इत्तेफाक नहीं था और उन्होंने जीवन भर समाज सेवा का भी वचन लिया था. बाद में समाजसेवा के लिए उन्‍होंने कभी शादी ना करने का फैसला ले लिया.

Mamata Banerjee

हिंदी में गूगल पर ममता बनर्जी का नाम बांग्लादेश में भी खूब सर्च हुआ

स्टूडेंट पाॉलिटिक्स से सक्रिय राजनीति में ममता ने दक्षिण कोलकाता के जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय से उन्होंने इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री ली. श्रीशिक्षायतन कॉलेज से उन्होंने बीएड की डिग्री ली, जबकि कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से उन्‍होंने कानून की पढ़ाई की. कालेज लाइफ से वो स्टूडेंट पालिटिक्स में आ गईं. वहीं से उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा. पहले वो कांग्रेस में शामिल हुईं. उसके बाद अपनी खुद की पार्टी बनाई.




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