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महामारीः पॉश इलाकों की तुलना में झोपड़पट्टियों में कोरोना के केस कम क्यों हो रहे हैं?

न्यूज18 गुजराती, नई दिल्ली. अहमदाबाद शहर में कोरोना वायरस (Coronavirus) का दूसरा दौर उफान पर है. शहर में सोमवार को कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामले दर्ज हुए. यही वह समय था जब इस शहर को एक ऐसी बात का पता चला जो चौंकानेवाला था. शहर के झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों (स्लम) में कोरोना के मामले अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम हैं. शहर के चंडोला झील, वासना, गुलबाइ टेकरा, मिल्लाटनगर, शाह आलम, वदाज, गुप्तानगर, मजूरगाम, असरवा-चमनपुरा, सरसपुर-पोटलिया झील क्षेत्र में झुग्गी-झोपड़ियां हैं, जहां भारी संख्या में लोग कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना ही घूमते-फिरते हैं. यही स्थिति मुंबई के धारावी की भी है, जो इस शहर का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा स्लम क्षेत्र है. इन क्षेत्रों में देश में कोरोना के चल रहे दूसरे उफान का असर कम दिखाई देता है.

झोपड़ियों में कोरोना का प्रकोप कम क्यों?
एक गुजराती अखबार में छपी खबर की मानें तो सरकारी टास्क फोर्स के एक सदस्य डॉक्टर दिलीप मावलंकर का कहना है कि यह शोध का विषय है. स्लम क्षेत्र में रहने वाले लोगों को कोरोना का संक्रमण कम होने का कारण उनके शरीर की इम्यूनिटी है. इसके अलावा, सघन आबादी वाले इलाके में रहने, प्रदूषित जल पीने के कारण अक्सर वे बीमार पड़ते रहते हैं. इस वजह से उनके शरीर में एंटीबॉडीज बन जाते हैं.

यह ऐसे ही है कि विदेश का कोई आदमी यहाँ आता है तो वह यहाँ का पानी पीने से बीमार पड़ जाता है. हमारे यहाँ जब कोई भिखारी बासी खाना खाता है तो भी वह बीमार नहीं पड़ता. स्लम में रहने या फुटपाथ, ट्रकों, नावों में सोनेवाले ये लोग अमूमन खुली हवा और धूप में घूमते हैं, जिसकी वजह से इनके शरीर में विटामिन डी की मात्रा अधिक होती है.डॉक्टर मावलंकर ने आगे कहा कि पैसेवाला शिक्षित वर्ग कोरोना से ज्यादा संक्रमित हो रहा है. अधिकतर मंत्री और विधायक कोरोना से बच नहीं पाए हैं. राहुल गांधी, मनमोहन सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की पत्नी सब के सब कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं.

स्लम में रहने 57 फीसदी में एंटीबॉडीज
सीईआरओ सर्वेक्षण में कहा गया है कि कुछ स्लम में रहने वाले 57 प्रतिशत लोगों में कोरोना के एंटीबॉडीज पाए गए हैं. वहीं मुंबई के पॉश एरिया में रहने वाले 16 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडीज पाए गए. हालाँकि, सीईआरओ सर्वेक्षण में धारावी क्षेत्र का नमूना नहीं लिया गया था, पर जिस तरह से यह क्षेत्र बड़ा है, उसको देखते हुए यहाँ कोरोना एंटीबॉडीज काफी संख्या में लोगों के शरीर में होगी.

क्या यह हर्ड इम्यूनिटी है?
स्लम क्षेत्रों में रहनेवाले लोगों को लॉकडाउन के दौरान घर में ही रहने को बाध्य होना पड़ा. इसी बीच हर्ड इम्यूनिटी, उनमें तब आया होगा, जब लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वे भारी संख्या में काम करने को बाहर निकले.

विटामिन डी गोली के फायदे का दावा
शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि मल्टीविटामिन, ओमेगा-3 और प्रो-बायोटिक्स या विटामिन डी सप्लीमेंट लेना कोरोना वायरस के खिलाफ लाभदायक रहा है. इन विटामिनों और ओमेगा-3 आदि से विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा ज्यादा होती है, ऐसा माना जाता है. किंग्स कॉलेज, ब्रिटेन के शोधकर्ता भी इस शोध में शामिल थे. इस शोध को पिछले साल तब जारी किया गया था, जब कोरोना अपने पाँव पसारने लगा था.




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