उज्जैन तड़का

11 मौतों के बाद जागा प्रशासन,  दवा बाजार में कार्रवाई

स्प्रिट और कच्ची शराब के सौदागर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, पूरे मामले में आबकारी विभाग शंका के दायरे में

उज्जैन। Thu- 15 Oct 2020

2 दिनों में हुई 11 लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन नींद से जागा। एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी ने ताबड़तोड़ मेडिकल शॉप पर कार्रवाई कर अवैध रूप से जमा की गई स्प्रिट जप्त की है। वहीं दूसरी ओर अभी भी नशे के सौदागर पुलिस की गिरफ्त से दूर बताए जा रहे हैं। शहर में अवैध रूप से बिक रही कच्ची शराब के मामले में आबकारी विभाग में घिरा हुआ नजर आ रहा है।

उज्जैन में 2 दिनों में झिंजर, कच्ची शराब और स्प्रिट के सेवन से बुधवार को सुबह से देर शाम तक 7 लोगों की मौत हो गई। जबकि गुरुवार को सुबह से ही 4 मृत लोगों की लाश शहर के अलग-अलग हिस्सों से मिली। पहले दिन तक तो पुलिस ने मामले को संदिग्ध करार दिया। लेकिन जैसे ही लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ा दो अधिकारियों की सांसे भी फूल गई। अपनी इज्जत बचाने के लिए ताबड़तोड़ जिला प्रशासन भी मैदान में आ गया और माधव क्लब रोड स्थित दवा बाजार पर कार्रवाई कर दी गई।

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मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

नशीले पदार्थ कच्ची शराब के सेवन से 11 लोगों की मौत और 1 की गंभीर हालत के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने एसआईटी के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की जांच करवाए जाने की बात कही है। शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। गुरुवार सुबह एसपी मनोज सिंह एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी सहित अन्य अधिकारी जांच के लिए महाँकाल थाने पर पहुंचे थे।

खाराकुआ थाने पर गिरी गाज

गुरुवार सुबह एसपी मनोज सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खारा कुआं थाना प्रभारी मनोहर लाल मीणा एसआई निरंजन शर्मा सहित दो आरक्षक को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। बताया जा रहा है कि उक्त कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि थाना प्रभारी और उनकी टीम ने समय रहते थाना क्षेत्र में हो रही मौत की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी।

बेलगाम हुए आबकारी अधिकारी

नशीले पदार्थ के सेवन से हुई 11 मौतों के मामले में आबकारी विभाग भी शंका के दायरे में आ खड़ा हुआ है। अवैध शराब और कच्ची शराब की बिक्री को रोकने का सबसे बड़ा दायित्व आबकारी विभाग का बनता है। एक के बाद एक हुई 11 मौतों के बाद भी आबकारी विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि आबकारी विभाग पूर्ण रूप से बेलगाम हो चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों का नियंत्रण भी नहीं रहा है।

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