उज्जैन तड़का

Ujjain-गुरुनानक एवं देशमुख अस्पताल पर हो सकती है FIR

मरीज के परिजनों से मंगवाई ऑक्सीजन कलेक्टर ने जारी किए नोटिस

कोरोना मरीजों के परिजनों ने मोटी रकम जमा करवाकर आॅक्सीजन सिलेंडर भरवाने के लिए देने वाले दो अस्पतालों को उज्जैन कलेक्टर ने नोटिस जारी किए है। अस्पताल संचालकों ने तत्काल नोटिस का जवाब भी मांगा गया है। उचित जवाब नहीं मिलने पर दोनो अस्पतालों पर एफआईआर भी दर्ज हो सकती है।

उज्जैन। Sat-01 May 2021

उज्जैन शहर के दो अस्पतालों पर जल्द ही गाज गिर सकती है। कलेक्टर आशीषसिंह ने नोटिस जारी कर दोनों अस्पताल के प्रबंधकों से तत्काल जवाब भी मांगा है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की चेतावनी तक दे डाली। दोनों अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने कोरोना मरीजों के परिजनों ने हजारों रुपए जमा करवाकर ऑक्सीजन सिलेंडर दिए थे। ताकि परिजन उनके ऑक्सीजन भरवा कर ला सकें। शिकायत पर उक्त कार्रवाई की गई है।

कलेक्टर आशीष सिंह ने शनिवार को उज्जैन शहर के गुरुनानक हॉस्पिटल एवं देशमुख अस्पताल को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि वे अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजो के परिजनों को ऑक्सीजन के जम्बो सिलेंडर में ऑक्सीजन भरवाने के लिए न दें। जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है कि उक्त दोनों अस्पतालों द्वारा मरीजों के परिजनों से डिपॉजिट लेकर ऑक्सीजन भरवाने के लिए सिलेंडर दिए जा रहे हैं। कलेक्टर ने गुरुनानक एवम देशमुख हॉस्पिटल के संचालकों को नोटिस जारी कर तत्काल स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है

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उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा निजी अस्पतालों को कई बार निर्देशित किया जा चुका है कि वे ऑक्सीजन के जंबो सिलेंडर भरवाने हेतु मरीजों को परिजनों को न सौंपे। अस्पताल में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाना अस्पताल की जिम्मेदारी है ना कि परिजनों की ।इससे संक्रमण का खतरा होने के साथ-साथ परिजनों को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना भी झेलना पड़ती है। फिर भी देशमुख एवं गुरुनानक हॉस्पिटल द्वारा कई मरीजों के परिजनों से डिपॉजिट रख्वाकर सिलेंडर प्रदान किया जाना पाया गया

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कलेक्टर ने नोटिस में चेतावनी दी है कि समुचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत नही किए जाने पर संबंधित हॉस्पिटल के विरुद्ध आवश्यक सेवा एवं विच्छिनता निवारण अधिनियम की धारा 4, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 56 एवं महामारी अधिनियम 1897 की धारा 3 के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता 1807 की धारा 188 ,269 व 270 के अंतर्गत दंडात्मक प्रकरण दर्ज कराया जाकर अस्पताल के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

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