उज्जैन तड़का

मिट्टी में दब रह महाकाल मंदिर का इतिहास

-अधिकारियों की अनदेखी का शिकार हो प्राचीन अवशेष

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महाकाल मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान निकले हजारों साल पुराने इतिहास के साक्षी रहे अवशेष एक बार फिर से लापरवाही के कारण उसी भूमि में समा रहे है। अवशेष अभी भी वहीं पर बिखरे पड़े हुए है। निमार्ण कार्य में चल रही मशीनों के कारण या तो वे क्षतिग्रस्त हो रहे है। या फिर मिट्टी में दब रहे है।

उज्जैन। Mon-07 Jun 2021

महाकाल मंदिर में चल रहे निमार्ण कार्य में हो रही खुदाई में मंदिर का प्राचीन इतिहास और धार्मिक प्रमाण फिर से जमींदोज हो रहे है। खुदाई के दौरान मंदिर परिसर से मिले अवशेषों को अभी तक अधिकारी एकत्र नहीं कर सके। यहीं कारण है कि अवशेष अभी भी यहां-वहां फैले हुए है। वहीं निमार्ण कार्य के कारण चलाई जा रही मशीनों एक बार फिर से जमीन में दब रहे है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र का मध्य प्रदेश शासन व मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त उपक्रम में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से विस्तारिकरण किया जा रहा है। नवनिर्माण के दौरान की जा रही खुदाई में लगातार प्राचीन मंदिरों के वास्तुखंड, भग्न मूर्तियां, राज प्रसाद आदि के स्थापत्य खंड आदि मिल रहे हैं। दिसंबर 2020 से पुरा संपदा के मिलने का सिलसिला जारी है। करीब एक सप्ताह पहले भी खुदाई में दो हजार साल पुराने प्राचीन पात्रों के अवशेष, विक्रमादित्य कालीन दीवार तथा भव्य मंदिर व राज प्रसाद के भग्न अवशेष प्राप्त हुए थे। यह पुरासंपदा महाकाल मंदिर के गौरवशाली इतिहास को प्रमाणित करने के अकाट्य प्रमाण हैं।

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मंदिर समिति का ध्यान नहीं

इतिहास व पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार आनेवाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सहेजने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। स्थानीय प्रशासन व मंदिर समिति का इस ओर ध्यान नहीं है। निकलने के एक सप्ताह बाद भी पुरासंपदा उसी स्थल पर यत्रतत्र बिखरी पड़ी है। लागातार काम चलने से जेसीबी, पोकलेन आदि मशीनों के कारण कई अवशेष फिर से मिट्टी में दब गए हैं। स्थल निरीक्षण कर चुके इतिहास व पुरातत्व के जानकार का कहना है कि प्राप्त पुरासंपदा के रखरखाव व संरक्षण का जिम्मा फिलहाल मंदिर समिति का है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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क्षतिग्रस्त हुआ कीचक

पुरासंपदाओं के संरक्षण में प्रशासन की गंभीर लापरवाही समाने आई है। निर्माण स्थल पर बिजली का पोल गिरने से खुदाई में निकले भारवाही कीचक की मुखाकृति क्षतीग्रस्त हो गई है। महाकाल मंदिर समिति तथा निर्माण एजेंसी विकास प्राधिकरण अगर समय रहते ठेकेदार को पुरासंपदा सहेजने के निर्देश देती, तो पुराधरोहर को नुकसान नहीं पहुंचता।

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गिरने की कगार पर पेड़

विकास प्राधिकरण ने निर्माण स्थल पर लगे प्राचीन वृक्षों के संरक्षण के लिए उसके आसपास सीमेंट की रिंग लगाई थी। निर्माण एक्सपर्ट का कहना था कि इस स्कीम से पेड़ों को बारिश का पानी भी मिलेगा तथा यह लंबे समय तक जीवित रहेंगे। कार्य की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों आई आंधी बारिश में पेड़ गिरने की कगार पर पहुंच गए, बारिश के पानी से सीमेंट की रिंग भी ढह गई।

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विभाग को सौंप दी रिपोर्ट

महाकाल मंदिर के समीप निकली पुरातात्विक धरोहर के संबंध में पुरातत्व विभाग व संस्कृति संचालनालय को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इस संबंध में सोमवार को आदेश प्राप्त होने की संभावना है। इसकी जानकारी उज्जैन के संभागायुक्त व कलेक्टर को दी जाएगी।

– डा.रमेश यादव,पुरातत्व अधिकारी अभिलेखागार भोपाल

 

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