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Pegasus Spy Case: फ्रांस ने शुरू की पेगासस जासूसी मामले की जांच, भारत ने कही ये बात

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पेरिस. बड़े स्तर पर हैकिंग और जासूसी (Spying) के आरोप लगने के बाद पेगासस (Pegasus) स्पायवेयर एक बार फिर विवादों में है. इस बीच फ्रांस ने पेगासस स्पायवेयर हैंकिंग केस पर जांच के लिए कमिटी बना दी है. दरअसल, फ्रांस की संस्था Forbidden Stories और एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty international) ने मिलकर खुलासा किया है कि इजरायली कंपनी NSO के स्पाइवेयर पेगासस के जरिए दुनिया भर की सरकारें पत्रकारों, कानूनविदों, नेताओं और यहां तक कि नेताओं के रिश्तेदारों की जासूसी करा रही हैं. इस जांच को ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ नाम दिया गया है. निगरानी वाली लिस्ट में 50 हजार लोगों के नाम हैं. जो पहली लिस्ट पत्रकारों की निकली है जिसमें 40 भारतीय नाम हैं.

भारत सरकार ने क्या कहा?

रविवार को आई एक रिपोर्ट के बाद सोमवार को इस मुद्दे पर भारत की संसद से लेकर दुनिया भर में हंगामा मच रहा है. भारत सरकार ने ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ के आरोपों से इनकार किया है. सरकार ने कहा कि सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है. भारत सरकार ने अपने बयान में कहा, “भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जो अपने सभी नागरिकों के निजता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, इसने पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 और आईटी नियम, 2021 को भी पेश किया है, ताकि सभी के निजी डेटा की रक्षा की जा सके और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स को सशक्त बनाया जा सके.”

सरकार ने कहा कि अतीत में भारत सरकार के WhatsApp पर पेगासस का इस्तेमाल करने के ऐसे ही दावे किए गए थे. उन रिपोर्ट्स में भी कोई तथ्य नहीं था और भारतीय सुप्रीम कोर्ट में WhatsApp समेत सभी पक्षों ने इसका खंडन किया था.

ऐसे फोन को हैक कर लेता है पेगासस

पेगासस एक स्पायवेयर है. स्पायवेयर यानी जासूसी या निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर. इसके जरिए किसी फोन को हैक किया जा सकता है. हैक करने के बाद उस फोन का कैमरा, माइक, मैसेजेस और कॉल्स समेत तमाम जानकारी हैकर के पास चली जाती है.

2016 में पहली बार सुर्खियों में आया पेगासस

पेगासस सबसे पहले 2016 में सुर्खियों में आया था. तब UAE के ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट अहमद मंसूर को अनजान नंबर से कई SMS मिले थे. इनमें कई लिंक भेजी गई थीं. अहमद को इन मैसेज को लेकर शक हुआ तो उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स से इनकी जांच करवाई. पता चला कि अहमद मैसेज में भेजी लिंक पर क्लिक करते तो उनके फोन में पेगासस डाउनलोड हो जाता. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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