उज्जैन तड़का

Ujjain news -उज्जैन के इस गांव में होती है रावण की पूजा

Ujjain news -रावण की पूजा और दर्शन के लिए दूर-दूर से आते है ग्रामीण

Ujjain news बड़नगर रोड पर स्थित ग्राम चिकली में विजयादशमी पर रावण की पूजा किए जाने की परंपरा है। हर साल विजयादशमी पर रावण की पूजा ग्रामीणों द्वारा की जाती है। Ujjain news  गांव में रावण का एक मंदिर भी बन रहा है। रावण के मंदिर निर्माण के लिए ग्रामीणों ने पांच लाख रुपये जमा किए हैं। ऐसी मान्यता है कि गांव में रावण की पूजा दशकों से की जा रही है।

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Ujjain news  ग्राम चिकली के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रावण की पूजा की परंपरा आज से नहीं बल्कि सदियों पुरानी है। रावण का मंदिर कब और किसने बनवाया यह कोई नहीं जानता। लेकिन दशहरे पर रावण की पूजा का सिलसिला आज भी जारी है। गांव में रहने वाले कैलाश ने बताया कि हमने अपने पूर्वजों को रावण की पूजा करते देखा था और अब हम भी इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।

इसी प्रकार गांव में रहने वाले रमेश का कहना था कि एक बार गांव वाले रावण की पूजा करना भूल गए थे, उसके बाद गांव में भीषण आग लग गई और काफी नुकसान हुआ। जिसके बाद हमेशा दशहरे पर रावण की पूजा करने का विधान है। अन्य गांवों से भी कई लोग अपनी मर्जी से भी रावण की पूजा करने आते हैं। चिकली गांव में दशहरे के मौके पर शाम को गांव वाले भी रावण दहन करते हैं. चैत्र माह में आने वाली नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी और दशहरे पर यहां मेला भी लगता है।

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सुख समृद्धि के लिए होती है पूजा- Ujjain news

Ujjain news  ग्रामीणों का कहना है क गांव और यहां रहने वाले ग्रामीणों में सुख समृद्धि के लिए गांव के प्रत्येक नागरीक रावण की पूजा में शामिल होता है। रावण के मंदिर की हालत खराब होने के कारण अब ग्रामीण रावण के मंदिर का जीर्णोद्धार कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों से गांव में लगने वाले मेले की राशि और कोरोना के कारण ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए 5 लाख रुपये से रावण के मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

पूजा में मुस्लिम भी लेते है हिस्सा- Ujjain news

Ujjain news  मंदिर मेें दशहरे से एक दिन पहले सजावट की जाती है। यहां करीब 25 गांवों के लोग दर्शन करने आते हैं। खास बात यह है कि रावण की पूजा में मुस्लिम समाज भी हिस्सा लेता है। ऐसा माना जाता है कि रावण के मंदिर में जो भी भक्त मन्नत मांगता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इसी के चलते उज्जैन ही नहीं बल्कि गुजरात, राजस्थान से भी लोग रावण के इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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यहाँ भी होती है पूजा-Ujjain news

मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर में भी रावण की पूजा की जाती है। पुराने समय में मंदसौर को दशपुर कहा जाता था और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंदसौर रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था, जिसके कारण वहां के लोग उसे अपना दामाद मानते हैं। भले ही इस दिन भारत के कई स्थानों पर रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन मंदसौर में पूरे साल रावण की पूजा की जाती है।

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सालो पुरानी है ने मूर्ति-Ujjain news

मंदसौर में नामदेव समाज के लोग मंदोदरी को अपने वंश की पुत्री कहते हैं और इसी कारण वहां आज भी जमाई की तरह रावण का सम्मान किया जाता है। मंदसौर में रावण की एक विशाल प्रतिमा भी है जहां लोग प्रतिदिन उसकी पूजा करने आते हैं। 41 फीट ऊंची और विशाल रावण की यह प्रतिमा करीब चार सौ साल पुरानी मानी जाती है।

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